स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 के लिए सफाई सर्वे का सिस्टम बदल दिया गया है। दिल्ली से हर तीन महीने में आने वाली सर्वेक्षण टीम अब न तो सड़कों और नालियों की सफाई का सिस्टम देखने फील्ड में उतरेगी और न ही कचरा नुक्कड़ पर बने कचरा कलेक्शन सेंटर देखेगी। सर्वे वाली टीम अब केवल लोगों से पूछेगी कि आपके शहर की सफाई व्यवस्था कैसी है? कचरा कलेक्शन करने वाली टीम रोज घर-घर पहुंच रही है या नहीं? आम लोगों से मिलने वाले जवाब के आधार पर स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग तय की जाएगी।
केंद्रीय शहरी मंत्रालय ने अगले सत्र के स्वच्छता सर्वे के लिए नई गाइड लाइन जारी करते हुए जनता को सर्वे सर्वा बनाते हुए पूरे के पूरे 1800 अंक आम लोगों के फीड बैक पर दे दिए हैं। इतना ही नहीं जमीनी जांच को इस बार जनता की राय और सफाई की सुविधा के साथ मर्ज कर दिया गया है। यानी सफाई की स्थिति को आमलोग जिस तरह महसूस करेंगे, उसके आधार पर जमीनी जांच के जरिए आंकड़ों की जांच की जाएगी। सर्वेक्षण की नई गाइड लाइन में स्वच्छता लीग के मुकाबलों की संख्या दो से बढ़ाकर तीन कर दी गई है। यानी अब सर्वेक्षण साल में दो नहीं तीन बार होगा। तीन-तीन महीने के भीतर स्वच्छता लीग होने से सिस्टम में कसावट आने की उम्मीद है। बार-बार सर्वेक्षण होने से सिस्टम को दुरुस्त रखना मजबूरी होगी। ऐसा नहीं करने पर रैंकिंग में पिछड़ने का खतरा रहेगा।
पिछले सर्वे से ऐसे अलग
फाइनल मुकाबले में अंक
- 2021 में ऐसे बांटेंगे : 6000 अंक ( लोगों की राय पर 1800, दी जा रही सुविधा पर 2400, शहर को ओडीएफ व अन्य मिलने वाले सर्टिफिकेट पर 1800)
- 2020 में ऐसे थे : 6000 अंक ( लोगों की राय पर मिले 1500, दी जा रही सुविधा पर 1500, प्रत्यक्ष जांच 1500 और ओडीएफ व अन्य सर्टिफिकेट पर 1500)
ऐसे बांटे गए हैं अंक
- सफाई इंतजाम कैसे हैं, इस पर नंबर 600
- कचरा कैसे नष्ट और प्रोसेस किया जा रहा 800
- स्वच्छता का सिस्टम काफी है या अधूरा 600
कुल 2000 अंकों में दी जाएगी स्वच्छता रैंकिंग
अप्रैल से शुरू हो गई चुनौती
अप्रैल से ही स्वच्छता रैंकिंग को लेकर चुनौती शुरू हो गई है। अप्रैल से जून के बीच के आंकड़ों को नगर निगम के सफाई विभाग को 25 जुलाई तक केंद्र की वेबसाइट में अपलोड करना होगा। रैकिंग के लिए लोगों की राय लेने वेबसाइट में सफाई सिस्टम की जानकारी अपलोड कर दी जाएगी। उस जानकारी के साथ जो दावे किए गए जाएंगे, उसकी पड़ताल आम लोगों के फोन कॉल और स्वच्छता एप से मिलने वाली जानकारी से मिलाकर परीक्षण किया जाएगा। दावे और लोगों की राय से पता चल जाएगा कि निगम के सफाई विभाग ने कितनी सही जानकारी दी है। ये प्रक्रिया हर तीन में की जाएगी। तीन महीने का चक्र पूरा होने के बाद समीक्षा की जाएगी। इसी आधार पर लीग के रिजल्ट और रैंकिंग तय होगी।
सफाई से जनता खुश तो अच्छी रैंक
2021 के सफाई सर्वे का नया सिस्टम पूरी तरह से आम लोगों की राय पर तय होगा। इसके मापदंड ऐसे तय हुए हैं कि शहर के आम लोग अगर संतुष्ट नहीं हैं तो अच्छी रैंकिंग नहीं मिलेगी। स्वच्छता सर्वे में अच्छी रैंकिंग के लिए आम लोगों को सफाई के मामले में संतुष्ट रखना जरूरी है। ऐसे में निगम प्रशासन की मजबूरी हो जाएगी कि वह शहर के लोगों को शिकायत का मौका न दें।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/how-is-cleanliness-now-the-people-of-the-city-will-tell-that-the-rank-of-cleanliness-will-be-decided-on-their-opinion-127489508.html
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