जिले के वनांचल क्षेत्रों में सैकड़ों की संख्या में नदी नाले हैं। जिसमें बने पुल पुलियों की ऊंचाई कम होने से बारिश के सीजन में चार महीने तक लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता है। यही नहीं मुख्य मार्गों की पुल पुलियों की ऊंचाई नहीं बढ़ाई जा रही है। पीडब्ल्यूडी व प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़कों के कई पुल की ऊंचाई मात्र 3-4 फीट है।
जिसकी वजह से अधिक बारिश होने पर पुल के ऊपर पानी बहने लगता है। झगरहा से पसरखेत और मदनपुर-श्यांग मार्ग पर एक दर्जन से अधिक नाले हैं। जहां बारिश के समय नालों में बने पुलियों के ऊपर से पानी बहने पर आवाजाही बंद हो जाती है। अभी दो दिनों की बारिश में कुदमुरा से श्यांग मार्ग तीन दिनों तक बंद रहा।
यही हाल करतला ब्लाॅक के सिवनी से सुखरीकला मार्ग पर बने पुल के ऊपर रविवार को भी पानी बहता रहा। जिसकी वजह आवाजाही प्रभावित हुई। अजगरबहार से लेमरू मार्ग पर भी नदी नालों में पानी भरने से आवाजाही प्रभावित होती है। करतला ब्लाॅक के साथ ही कटघोरा, पाली व पोड़ी उपरोड़ा में भी नालों में बने पुल बारिश के समय डूब जाते हैं।
पहले कम ऊंचाई का पुल बनाने का प्रावधान : ईई
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के ईई कमल साहू का कहना है कि पहले कम ऊंचाई ( लो लेवल) का पुल बनाने का प्रावधान था। अब वर्ष 2011 से बड़ा पुल बनाने की अनुमति मिली है। जिसकी वजह से 4 पुलियों की ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है। लोगों को परेशानी न हो इसका प्रयास किया जा रहा है।
200 फीट चौड़ाई होने पर ही बनाते हैं बड़ा पुल: पीडब्ल्यूडी सेतु निगम के एसडीओ एके जैन का कहना है कि पुल पुलिया बनाने के लिए कई एजंेसियां हैं। लेकिन सेतु निगम 200 फीट की चौड़ाई वाले नदी नालों में पुल बनाने का प्रस्ताव भेजता है। जहां भी समस्या या मांग आती है उसके अनुसार प्रस्ताव दिया जाता है।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/bilaspur/korba/news/127-culverts-are-low-water-flows-in-rain-127670398.html
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