शिवानंद नगर में भक्त मंदिर की परिक्रमा कर पर्ची में लिखते हैं मनोकामना और अर्पित करते हैं गणेश को

गुढ़ियारी के शिवानंद नगर में बप्पा का एक ऐसा मंदिर हैं जहां दूर-दूराज से भक्त मनोकामना लिए पहुंचते हैं। यहां भक्तों की आवाज पर्ची के जरिए भगवान तक पहुंचती है। दरअसल, जो भक्त यहां मन्नत लेकर पहुंचते हैं उन्हें पर्ची कटवाकर मंदिर की 108 परिक्रमा करनी होती है। इसके बाद भक्त पर्ची पर अपनी मनोकामना लिखकर एक बॉक्स में डाल देते हैं। 5 दिन बाद पुजारी बॉक्स खोलकर सारी पर्चियां भगवान गणेश के श्रीचरणों में अर्पित कर देते हैं।
शिवानंद नगर में सिद्धिविनायक का यह मंदिर करीब 3 हजार स्क्वायर फीट में बना है। मंदिर निर्माण की शैली दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला से प्रभावित है। इसी वजह से इसे देखकर किसी दक्षिण भारतीय मंदिर के दर्शन का अहसास होता है। मान्यता है कि जो भी भक्त यहां सच्चे मन से भगवान की पूजा करता है, उसकी मुराद पूरी होती है। यही वजह है कि गणेश पक्ष ही नहीं, बल्कि पूरे साल यहां भक्तों की आवाजाही लगी रहती है। मंदिर के सेक्रेटरी के. मुकुंद बाबू बताते हैं कि सन् 2008 में मंदिर का निर्माण करवाया गया था। इसके लिए आंध्रप्रदेश से राजमुंदरी के कारीगरों को बुलवाया गया था। मंदिर में स्थापित प्रतिमा 5 फीट ऊंची है जो ब्लैक ग्रेनाइड सिंगल स्टोन को तराशकर बनाई गई है। इसे भी आंध्रप्रदेश से मंगवाया गया था।

यहां उत्तर-दक्षिण भारतीय, दोनों पद्धति से पूजा
यहां उत्तर और दक्षिण भारतीय, दोनों तरीके से भगवान की पूजा की जाती है इसलिए यहां 2 पंडितों को रखा गया है। हर बुधवार को रात 8 बजे भगवान की महाआरती की जाती है। मंदिर समिति का दावा है कि इस साप्ताहिक महाआरती मेें 300 से ज्यादा लोग शामिल होते हैं। हालांकि, कोरोना महामारी के चलते 18 मार्च की महाआरती के बाद से अब सिर्फ 5-7 लोग ही जुटते हैं।

इधर, बूढ़ापारा में गणेश को चढ़ा भोग खा जाता है चूहा
बूढ़ापारा स्थित गणेश मंदिर की स्थापना 1980 में कराई गई थी। मंदिर समिति के उपाध्यक्ष सुधीर राजवैद्य बताते हैं कि 50 साल पहले जब मंदिर बना था तब आसपास ज्यादा घनी आबादी नहीं थी। तब मंदिर में काफी चूहे आते थे। इससे किसी को परेशानी नहीं थी क्योंकि मूषक को भगवान गणेश की सवारी माना जाता है। इनडोर स्टेडियम बनने और घनी आबादी बसने के साथ ही यहां चूहे काफी कम आने लगे। आज भी एक सफेद चूहा मंदिर आता है और भगवान को चढ़ा प्रसाद खाकर चला जाता है।



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Devotees in Shivanand Nagar revolve around the temple and write it in a slip and offer it to Ganesh


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/devotees-in-shivanand-nagar-revolve-around-the-temple-and-write-it-in-a-slip-and-offer-it-to-ganesh-127663431.html

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