कोरोना संक्रमण की वजह से सात साल पुराने एडसमेटा मुठभेड़ की रुकी जांच में तेजी लाते हुए सीबीआई की 4 सदस्यीय टीम सोमवार को रायपुर आने के बाद घटना स्थल के लिए रवाना हो गई। यह जांच करीब 8 महीने से रुकी हुई थी। बताया गया कि सीबीआई की जांच टीम ने ग्रामीणों से घटना को लेकर पूछताछ की है। जांच टीम के चारों सदस्य टीआई स्तर के हैं।
सूत्र बताते हैं कि जांच टीम ने घटना से जुड़े गवाहों से पूछताछ की है। इससे पहले भी दो बार टीम आ चुकी है। पहली बार घटना स्थल का निरीक्षण किया था और फिर बाद में आई टीम ने गवाहों में से कुछ के बयान भी लिए थे। जांच टीम के गांव पहुंचने की जानकारी सभी ग्रामीणों को मिल गई है। बीजापुर के गंगालुर थाने के एडेसमेटा इलाके में 17 मई 2013 को मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में तीन बच्चों की मौत हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने प्रकरण की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। इससे पहले राज्य सरकार ने घटना के 11 दिन बाद 28 मई को एसआईटी गठित की थी।
आखिरी सुनवाई में एसआईटी द्वारा इन छह सालों में जो कार्रवाई की गई थी उसकी जानकारी एफिडेविड में मांगी गई थी। इसमें बीजापुर एसपी ने जो जानकारी दी है उसमें लिखा है कि इन छह सालों पांच लोगों के बयान दर्ज किए गए और माओवादियों का पकडऩे की कार्रवाई चल रही है। इस जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वे एसआईटी की जांच से संतुष्ट नहीं है। एसआईटी ने छह साल में बिल्कुल भी प्रभावी रूप से काम नहीं किया। एसआईटी की इसी रवैये को देखते हुए ही मामले की तेजी से जांच के लिए इस मामले को सीबीआई को दिया जाता है।
भाजपा ने पूछा : नक्सलियों के सफाए के लिए सरकार कब होगी आक्रामक
प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने भूपेश सरकार से सवाल किया है कि लगातार नक्सलियों द्वारा बस्तर संभाग में जवानों व आदिवासियों को अगवा कर उन्हें मौत के घाट उतारकर दहशत फैलाने और विध्वंसक करतूतों को अंजाम देने के खिलाफ प्रदेश सरकार कब आक्रामकता दिखाएगी? उन्होंने कहा कि इन दिनों नक्सली अपना स्थापना दिवस समारोह मना रहे हैं और इस बात की पूरी आशंका है कि वे इस दौरान प्रदेश, ख़ासकर बस्तर में किसी बड़ी हिंसक वारदात को अंजाम देंगे। बीजापुर में एक आम ग्रामीण की हत्या के मामले का जिक्र करते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि पखवाड़ेभर में नक्सली लगातार इसी तरह आदिवासी युवकों, पुलिस व सीआरपीएफ के जवानों और अन्य शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों की हत्या कर चुके हैं, लेकिन प्रदेश सरकार के निकम्मेपन के चलते नक्सली हिंसा पर काबू नहीं पाया जा सका रहा है। नक्सलियों की मुखालफत के नाम पर सिवाय सियासी बयानों ने कुछ और किया ही नहीं है। श्रीवास्तव ने कहा कि लगभग दो साल के अपने कार्यकाल में प्रदेश सरकार नक्सलियों से निपटने के लिए कोई ठोस व कारगर रणनीति तक तैयार नहीं की है।
इसी का नतीजा है कि नक्सली प्रदेश की कांग्रेस सरकार को ‘अपनी सरकार’ बताकर बेखौफ हिंसा कर रहे हैं। प्रदेश सरकार बताए कि उसके और नक्सलियों के इस रिश्ते को क्या नाम दिया जाए?
पुनिया ने संसद में की मांग 7 बटालियन करे तैनात
राज्य सभा सांसद पीएल पुनिया ने मंगलवार को संसद में छत्तीसगढ़ को सीआरपीएफ बटालियन जल्द उपलब्ध कराने का मुद्दा उठाया। संसद में पुनिया ने कहा कि गृह मंत्रालय ने 2008 में छत्तीसगढ़ के लिए सीआरपीएफ की 7 अतिरिक्त बटालियन आवंटित की थी, जिसे नक्सल विरोधी अभियानों एवं विकास मूलक गतिविधियों को गति देने के लिए दक्षिण बस्तर के सुकमा एवं बीजापुर जिले के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात करने का निर्णय लिया गया था। चयनित लोकेशन पर बटालियन मुख्यालय के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए राशि आवंटित की गई और अधिकांश लोकेशन पर निर्माण कार्य पूरा कराया जा चुका है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर से 10 सीआरपीएफ बटालियनों को कार्यमुक्त किया जा रहा है। इससे छत्तीसगढ़ के लिए 7 बटालियनों की उपलब्धता हो सकती है।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/news/cbi-arrives-to-investigate-edsmeta-encounter-stopped-for-8-months-witnesses-questioned-127745074.html
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