पॉवर प्लांट्स पर पड़ रहा दोहरा बोझ, एसोसिएशन ने मांगी बिजली शुल्क में 3% व जलकर में प्रति यूनिट छूट

प्रदेश के थर्मल पाॅवर स्टेशनों में लगने वाली ऐसी बिजली पर राज्य सरकार पाॅवर शुल्क ले रही है, जिसका न तो कोई उपयोग होता है और न ही इसे बेचा जा सकता है। ऐसी बिजली का कोई अन्य उपयोग भी नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद राज्य सरकार पॉवर प्लांट में खपत के नाम पर औसतन दस फीसदी टैक्स ले रही है। जिससे पॉवर प्लांट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है और कोरोना संक्रमण के दौर में पॉवर प्लांट्स पर अतिरिक्त सरजार्ज का दबाव भी बढ़ता जा रहा है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए एसोसिएशन ऑफ पॉवर प्रोड्यूसर्स ने राज्य सरकार से आक्जीलरी बिजली शुल्क में 3 प्रतिशत की छूट और जलकर में प्रति यूनिट छूट देने की मांग की है।
एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल अशोक खुराना ने मुख्य सचिव आरपी मंडल और एसीएस ऊर्जा सुब्रत साहू को इस संबंध में पत्र लिखा है। मुख्य सचिव मंडल को लिखे पत्र में खुराना ने बताया कि प्रदेश के निजी बिजली उत्पादकों ने राज्य के विकास में अहम भूमिका निभाई है। इन उद्योगों द्वारा सामुदायिक विकास के कामों जैसे बैराज और डैम के निर्माण भी कराए गए हैं। इसके लिए पहले साढ़े पांच रुपए प्रति घनमीटर की दर से जलकर लिया जाता था। बाद में इसे बढ़ाकर साढ़े दस रुपए प्रति घनमीटर कर दिया गया। एसोसिएशन ने मांग की है कि जलकर को साढ़े पांच रुपए प्रति घनमीटर से घटाकर 3 रुपए प्रति यूनिट किया जाए। साथ ही बिजली शुल्क के भुगतान से आईपीपी को उस दिन से तीन फीसदी तक छूट प्रदान करें जब से बिजली का उत्पादन शुरू हुआ है।
थर्मल पॉवर कीमांग में आई कमी
खुराना ने बताया कि 1974 के वाटर एग्रीमेंट में खपत कम हो या ज्यादा आवंटित पानी के 90 फीसदी का जलकर देना पड़ता था। पूरे देश में इन दिनों थर्मल पॉवर की मांग में कमी आई है क्योंकि सभी प्लांट का लोड फैक्टर कम हुआ है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के डाटा के अनुसार पीएलएफ के राष्ट्रीय औसत में भारी गिरावट दर्ज की गई है। 2009-10 में पीएलएफ जहां 78 प्रतिशत था, वहीं 2019-20 में यह 56 प्रतिशत हो गया है।

आईपीपी का पीएलएफ भी घटा
खुराना ने बताया कि इन्हीं सालों में आईपीपी का पीएलएफ भी 84 से घटकर 55 प्रतिशत हो गया है। भारी वित्तीय संकट के कारण 8 हजार मेगावाट के ये आईपीपी या तो फंसे हुए हैं या फिर -55% के बहुत कम पीएलएफ में काम कर रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में हमारी मांग है कि जलकर की वसूली की दर 5.5 रुपए प्रति घनमीटर से घटाकर 3 रुपए प्रति यूनिट किया जाए। इसी तरह से पानी के आवंटन या वास्तविक उपयोग के हिसाब से जलकर को 90 प्रतिशत से घटाकर 55 प्रतिशत किया जाए।

पांच फीसदीहिस्सा राज्यों को
पॉवर प्लांट्स अपने द्वारा पैदा होने वाली बिजली का पांच फीसदी हिस्सा राज्य सरकार को देते हैं। साथ ही राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास के तहत रोजगार, पुनर्वास के साथ सीएसआर के कई काम भी करते हैं। इनके अलावा राज्य को कोल रायल्टी, राज्य मुआवजा उपकर, जल उपकर, जमीन की लीज और लैंड डायवर्जन फीस जैसे भुगतान भी किए जाते हैं।

पत्र पर विचार करेंगे : साहू
"एसोसिएशन की मांग पर अध्ययन करने के बाद रियायतों के व्यय भार का आंकलन करेंगे। सरकार समय-समय पर उद्योगों के लिए फैसले ले रही है।"
-सुब्रत साहू, अपर मुख्य सचिव, ऊर्जा विभाग

उद्योगों की डिमांड पर चर्चा करेंगे : मंडल
"प्रस्ताव आने के बाद पॉवर कंपनियों की डिमांड पर क्या किया जा सकता है, उस पर विचार करेंगे। मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद उचित निर्णय लेंगे।"
-आरपी मंडल, मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़



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प्रतीकात्मक फोटो।


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/double-burden-on-power-plants-the-association-asked-for-3-rebate-in-electricity-tariff-and-per-unit-rebate-in-water-127376443.html

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