आंदोलन के 4 माह बाद गिरफ्तारी देने बुला रही पुलिस

फरवरी-मार्च 2020 में 3 हजार से अधिक पंजीकृत किसानों को टोकन देने के बावजूद उनका धान नहीं खरीदा जा रहा था। इससे नाराज किसानों ने भारतीय किसान संघ के बैनर तले चक्काजाम आंदोलन किया था। इस पर चार थानों में 50 से अधिक किसानों के
खिलाफ नामजद एफआईआर हुई थी। आंदोलन के चार महीने बाद अब किसानों को थानों से गिरफ्तारी देने कॉल आ रहे हैं।
कॉल कर पुलिस कह रही है कि चक्काजाम के चलते आपके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट निकला है। आप थाने आइए और गिरफ्तारी दीजिए। भारतीय किसान संघ के कानों तक जब यह बात पहुंची तो संघ के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को कवर्धा स्थित बलराम परिसर में बैठक बुलाई। चर्चा के दौरान बताया कि जायज मांगों को लेकर किसानों ने आंदोलन किया था। इसलिए आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने उनकी मांगें मानकर टोकन धारी किसानों का धान खरीदा। अगर मांग सही थी तो एफआईआर का सवाल नहीं उठता। अब सरकार से किसानों के खिलाफ रिपोर्ट वापस लेने मांग की जा रही है।

राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाई: दानेश्वर

भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष दानेश्वर परिहार बताते हैं कि संघ ने बिना किसी राजनीतिक उद्देश्य के किसानों का धान बिकवाने चौतरफा आंदोलन कर चक्काजाम किया। अंततः सरकार ने को धान खरीदी करनी पड़ी। आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय संपत्ति या कोई व्यक्तिगत क्षति नहीं हुई।

आज एसपी से मिलकर राहत देने निवेदन करेंगे

बैठक के दौरान किसानों ने तय किया कि वे शनिवार को पुलिस अधीक्षक से मिलेंगे। रिपोर्ट वापस लेकर किसानों का राहत देने निवेदन करेंगे। अगर एसपी ने निवेदन स्वीकार नहीं करते तो जिलेभर के किसान पुलिस कार्रवाई के लिए तैयार रहेंगे। बैठक में अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई।

एसपी ने कहा- किसानों ने किया था चक्काजाम

एसपी केएल ध्रुव का कहना है कि किसानों ने चक्काजाम किया था, जिसके चलते उन पर एफआईआर हुई थी। मांगों को लेकर किसानों ने जो आंदोलन का तरीका अपनाया, वह सही था या गलत, यह फैसला न्यायालय करेगी। फिलहाल उन्हें गिरफ्तारी देने कहा जा रहा है।



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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/kawardha/news/police-is-calling-for-arrest-after-4-months-of-agitation-127452135.html

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