ये तस्वीर है शहर के बीचों-बीच बनाए गए ऑक्सीजोन की। तीन साल पहले कलेक्ट्रेट कैंपस के पीछे लगभग 19 एकड़ में 12 कराेड़ की लागत से डेवलप किए गए इस मानव निर्मित जंगल काे बनाने के लिए कई दुकानाें काे ताेड़ा गया था। तब इसका भारी विराेध हुआ था, लेकिन अब यही जाेन शहर के लंग्स बन चुके हैं। पांच हजार से ज्यादा पेड़ाें से घिरे इस जाेन में लाॅकडाउन से पहले राेजाना लगभग दो हजार लाेग माॅर्निंग और ईवनिंग वाॅक करने आते थे। यहां अधिकतर ऐसे पेड़ हैं, जिनसे अधिक मात्रा में ऑक्सीजन निकलती है। ऐसी ग्रीनरी शहर के बीचों-बीच कही भी नहीं है।
- यहां चारों ओर पाथवे बनाया गया है।
- यहां मेडिटेशन जोन और वाॅर्मअप स्पेस भी है।
- हर उम्र के लोगों के लिए ओपन जिम और बच्चों के लिए चिल्ड्रन जोन भी है।
- प्राकृतिक सौंदर्य का अहसास कराने के मकसद से यहां कृत्रिम तालाब भी बनाया गया है।
जल: केंद्रीय भू-जल की रिपोर्ट के अनुसार रायपुर का जल स्तर 2019 में 20 मीटर नीचे जा चुका था। लेकिन लॉकडाउन के कारण इस साल जल स्तर गिरने के बजाय 20 मीटर ही रहने का अनुमान है।
हवा: लॉक डाउन से पहले PM 10 यानी हवा में धूल के बड़े कणों की मात्रा औसतन 110 माइक्रो ग्राम क्यूबिक मीटर थी, ये अब 60 माइक्रो ग्राम क्यूबिक मीटर रह गई है। PM 10 का स्तर 100 माइक्रो ग्राम क्यूबिक मीटर से कम सामान्य और 100 से ज्यादा होने पर सेहत के लिए नुकसानदेह माना जाता है।
ध्वनि: लॉकडाउन से पहले शहर में ध्वनि प्रदूषण लगभग 65 डेसिबल था, ये अब लगभग 47 डेसिबल है। मानक स्तर 45 डेसिबल है।
7 एकड़ में बना रहे सेकेंड फेज़
- ऑक्सीजोन के दूसरे फेज़ का लगभग 90% काम पूरा हो चुका है। इस माह के आखिर तक होगा तैयार
- उस इलाके के आसपास रहने वाले लगभग 10 हजार लाेग भी ऑक्सीजोन से सीधे जुड़ सकेंगे।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/new-langas-found-in-the-city-through-oxygen-this-zone-surrounded-by-5-thousand-trees-giving-breath-to-ten-thousand-lives-127376405.html
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