जलभराव की समस्या का स्थाई समाधान नहीं होने से अब फिर घरों में घुसेगा नाले का पानी

नई शहर सरकार भी जलभराव की सालों पुरानी समस्या के लिए कोई स्थाई समाधान नहीं ढूंढ सकी है। सिर्फ नालों की सफाई कर प्रभावित मोहल्लों में घरों को बचाने का दावा कर रही है। बुधवार को दैनिक भास्कर की टीम ने तीन सबसे ज्यादा प्रभावित मोदी नगर, पैठूडबरी, बावली कुआं की पड़ताल की, इन तीनों मोहल्लों में पानी निकासी के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं मिले।

रेलवे का अधूरा निर्माण मोदी नगर को ले डूबेगा
मोदी नगर की समस्याएं इस साल भी बारिश में कम नहीं होने वाली है, क्योंकि रेलवे ने तीसरी लाइन के नीचे नाले की सैंटरिंग प्लेट बारिश का पानी रोकेगी। निगम इसे जल्दी हटाने के लिए रेलवे को पत्र लिखने की तैयारी कर रहा है। यहां रहने वाली रश्मि पंडा बताती है कि कॉलोनी के बीच से गुजरे नाले में विजयपुर, बोइरदादर, शालिनी स्कूल, दुर्गा चौक की तरफ से बारिश का पानी आता है। रेलवे लाइन के नीचे पर्याप्त निकासी नहीं होने कारण हर साल पानी घर के भीतर तक जमा हो जाता है।
पैठू डबरी नाले की सफाई, लेकिन चौड़ाई कम

पैठूडबरी मोहल्ला सतह से छह फीट नीचे हैं, जिसकी वजह से बूढ़ी माई तालाब, विकास नगर, बंगलापारा, दरोगापारा का पानी ओवरफ्लो होकर मोहल्ले में जमा हो जाता है। जितनी मात्रा में यहां पानी जमा होती है, उतनी मात्रा में निकासी की व्यवस्था नहीं है। यहां नाले के ऊपर फेब्रिकेशन, होटल व्यवसायियों के साथ-साथ निगम कर्मियों के रिश्तेदारों का अतिक्रमण हैं। इससे नालियों चोक हो जाती हैं, मोहल्ले वालों को मुसीबत का सामना करना पड़ता है।

बावली कुआं डबरी की अधूरी सफाई मुसीबत
निगम की अधूरी सफाई और अनदेखी के कारण इस मोहल्ले में इस बार फिर से जल भराव का खतरा बना हुआ है। बीते सालों में इस समस्या का सामना कर चुके गणेश कछवाहा बताते हैं कि भुजबंधान तालाब से सटी इस डबरी बावलीकुआं, बैकुंठपुर, धांगरडीपा, झाकर गली, कोतरा रोड, सर्वेश्वरी नगर, चूना भठ्‌ठा का पानी जमा होता है। पानी ज्यादा होने पर नालियां चोक हो जाती हैं और गंदा पानी घर के भीतर दो फीट तक भर जाता है। पिछली बरसात में यहां जल भराव के कारण मकान भी ढह गया था।

केएमटी कॉलेज की बिल्डिंग अधूरी फिर प्रभावित होगी पढ़ाई
केएमटी कॉलेज में भी जल भराव की समस्या का स्थाई समाधान नहीं ढूंढ सके हैं। कॉलेज के प्राचार्य डॉ अतुल श्रीवास्तव ने पुरानी बिल्डिंग के लिए आधा दर्जन से ज्यादा पत्र शासन को समाधान के लिए लिख चुके हैं, लेकिन जल भराव की समस्या को दूर करना तो दूर अधूरी बिल्डिंग को पूरा करने 60 लाख रुपए की शेष राशि भी कॉलेज को नहीं दी है। इन परिस्थितियों में कॉलेज में बारिश का पानी जमा हुआ तो कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं है। जुलाई से सिंतबर तक कॉलेज में स्टूडेंट्स की पढ़ाई बीते सालों की तरह प्रभावित रहेगी।
कब्जा हटाने में समय लगेगा
"जिन मोहल्लों में बारिश का पानी जमा होता है, वहां से पानी बाहर निकालना ही एक मात्र विकल्प है, लेकिन इन नालों में जगह-जगह अतिक्रमण है। अतिक्रमण करने वालों में बड़े व्यवसायियों से लेकर निगम कर्मी तक हैं, इन्हें हटाने के लिए बड़ी कार्रवाई करेंगे, लेकिन इस प्रक्रिया में समय लगेगा।''
-जयंत ठेठवार, सभापति नगर निगम

बारिश तक सफाई ही एकमात्र विकल्प
"बारिश तक नालों की सफाई ही एक मात्र विकल्प है। इतने कम समय में कुछ नहीं किया जा सकता। इसलिए हम नालों की सफाई पर पूरा फोकस कर रहे हैं, जहां थोड़े-बहुत काम है, उसे भी पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। बारिश से पहले नाले की सफाई करा ली जाएगी।''
-भूपेश सिंह, सहायक स्वास्थ्य अधिकारी



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Due to lack of permanent solution to the problem of water logging, drain water will enter the houses again


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raigarh/news/due-to-lack-of-permanent-solution-to-the-problem-of-water-logging-drain-water-will-enter-the-houses-again-127372920.html

Post a Comment

और नया पुराने