मैनपाट में मोनेस्ट्री तैयार, गुरुकुल की तरह होगी स्थापित

छत्तीसगढ़ के शिमला के नाम से मशहूर मैनपाट का तिब्बती समाज जिस विशाल मोनेस्ट्री (मंदिर) बनने का सपना देख रहा था वह साकार हो गया है।पिछले एक दशक से भी अधिक समय से इस पर काम चल रहा था। मैनपाट के टांगीनाथ इलाके के विशाल मोनेस्ट्री में तिब्बती कल्चर की छटा देखते ही बनती है।

यहां गौतम बुद्ध की करीब 20 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। इसके निर्माण में करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं। मंदिर के संचालक तासी ग्युरमेद ने बताया कि तिब्बती समाज खासकर यंग जेनरेशन को पूर्वजों की परंपरा व विरासत से जोड़ने का यह प्रयास है। गुरुकुल की तरह इसे स्थापित किया जा रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों के 50 से अधिक लामा यहां रह रहे हैं। लामाओं के लिए परिसर में ही हाॅस्टल का काम चल रहा है। पढ़ाई के साथ, पूजा पाठ शुरू हो गई है। हाॅस्टल तैयार होने के बाद इसका उद्घाटन किया जाएगा। पूरा निर्माण कार्य भूटान और नेपाल के कारीगरों की देखरेख में हुआ है।

मैनपाट में तिब्बतियों का यह सबसे बड़ा चौथा मंदिर

मैनपाट में साठ के दशक में तिब्बतियों को बसाया गया था। सात कैंपों में यह तिब्बती रहते हैं। तिब्बतियों का मैनपाट में यह सबसे बड़ा मंदिर है। इसके अलावा कैंप नंबर 1,2,3 में तीन और मंदिर हैं। तिब्बतियों को यहां बसाए जाने के बाद पर्यटन के नक्शे पर मैनपाट की पहचान बढ़ी। ठंडे इलाका होने के कारण तिब्बतियों को यहां बसाया गया था। समुद्र तल से करीब सौ फीट ऊंचाई पर मैनपाट बसा हुआ है।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/bilaspur/ambikapur/news/monastery-ready-in-mainpat-will-be-established-like-gurukul-127507289.html

Post a Comment

और नया पुराने