विकासखंड के मुख्यालयों से सुदूर गांवों में स्वास्थ्य सेवा की ऐसी बदहाल स्थिति है। इसे इस बात से समझा जा सकता है कि पंडो जनजाति के एक ग्रामीण का जबड़ा सड़क दुर्घटना में टूट गया।
इस पर गांव के ही झोलाछाप डॉक्टर ने ही दस हजार में ठेका लेकर इलाज का दावा किया। 10 दिनों तक झोलाछाप डॉक्टर ग्रामीण को अपने पास रखा, जब हालात गंभीर होने लगी तो उसे अस्पताल जाने की सलाह दी, लेकिन तब तक स्थिति बिगड़ चुकी थी। ग्रामीण को रायपुर ले जाया गया, लेकिन उसकी मौत हो गई। मृतक के परिजन झोलाछाप डॉक्टर के विरुद्ध कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ग्राम पंचायत पचावल के छोटई पंडो 12 मई को अपने बेटी दामाद विजय कुमार पंडो ग्राम से बेलसर से वापस अपने गांव पर पचावल ऑटो से आ रहे थे। वह ग्राम डुंगरु में कुंडपान पर मोड़ के पास पलट गया। जिससे छोटई का जबड़ा टूट गया। इस पर गांव के ही झोलाछाप डॉक्टर ने दस हजार में ठेका लेकर इलाज किया। उसकी स्थिति बिगड़ती रही, तब उसे रायपुर ले जाया गया जहां इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। परिजनों का कहना है कि झोलाछाप डॉक्टर ने ठीक कर देने का आश्वासन देकर बाहर इलाज करने जाने से रोक दिया।
सनावल थाने में आवेदन लेने से किया इनकार
छोटई पंडों के पत्नी बसिया ने आरोप लगाया कि पति के मृत्यु के बाद झोला छाप डॉक्टर के विरुद्ध आवेदन लेकर सनावल थाने गए तो वहां आवेदन लेने से इनकार किया गया कहा गया कि जाइए कलेक्टर एसपी के पास। बसिया ने आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आवेदन लेने की बात कही गई।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/bilaspur/ramanujganj/news/the-doctor-was-doing-treatment-the-situation-worsened-if-sent-to-raipur-death-127494025.html
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