1933... यह वही साल है जब महात्मा गांधी रायपुर आए थे। हरिजनों को पुरानी बस्ती के जैतूसाव मठ में प्रवेश दिलाकर देशभर में अस्पृश्यता आंदोलन की शुरुआत की थी। इसी दिन वे पुरानी बस्ती के एक और मंदिर भी गए थे, जिसके बारे में कम ही लोगों को मालूम है। यह मंदिर है टूरीहटरी स्थित गणेश मंदिर। यहां उन्होंने आरती भी की थी। शहर में यह इकलौती जगह है जहां तंत्र विद्या से सिद्धि के बाद गणेशजी की स्थापना की गई है।
दरअसल, बाल गंगाधर तिलक ने देश की आजादी के लिए क्रांतिकारियों को इकट्ठा करने गणेश पक्ष को उत्सव के रूप में मनाने की जो शुरुआत की थी, उसी से प्रभावित होकर शंकरानंद झा ने 1933 में पुरानी बस्ती के टूरी हटरी में इस मंदिर की स्थापना कराई थी। पंडित सुमन झा बताते हैं कि शंकरानंद के ससुर पं. हलधर शास्त्री तंत्र के जानकार थे। उन्होंने ही गणेशजी की प्रतिमा को तंत्र विद्या से सिद्ध करने के बाद मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा कराई थी। जानकार बताते हैं कि शहर में यह इकलौती जगह है जहां गणेशजी को तंत्र विद्या से सिद्ध करने के बाद स्थापित किया गया है। गौरतलब है कि शहर के मंदिरों में यहां से प्राचीन गणेश प्रतिमाएं स्थापित हैं, लेकिन इससे पहले अलग से कोई मंदिर नहीं बना था। इस लिहाज से 1933 में स्थापित यह शहर का पहला गणेश मंदिर है।
648 किमी दूर बनारस से बैलगाड़ी पर लाए थे मूर्ति
मंदिर में स्थापित भगवान की प्रतिमा सिंगल पत्थर को तराशकर बनाई गई है। करीब 88 साल पहले इसे बनारस से लाया गया था। तब आवागमन के सीमित साधन हुआ करते थे इसीलिए 648 किलोमीटर दूर से यह प्रतिमा बैलगाड़ी पर लाई गई थी। इसके अलावा यहां की एक और खासियत है कि भगवान को मनोकामना सिद्धिविनायक के रूप में स्थापित किया गया है। मान्यता है कि ये हर कामना पूरी करते हैं।
यहां भगवान की सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई है
मंदिर में स्थापित भगवान की प्रतिमा दाईं ओर मुड़ी हुई है। भगवान की प्रतिमा में भगवान की सूंड दाईं और बांई होने का अलग महत्व है। मंदिर में स्थापित भगवान की सूंड दाईं ओर है। ऐसी प्रतिमा शहर में कम ही है। पंडितों के मुताबिक जिस प्रतिमा में गणेश की सूंड दाईं ओर होती है, उसे सिद्धिविनायक का स्वरूप माना जाता है। बांई तरफ की सूंड वाले गणेश को विघ्नविनाशक कहते हैं। सिद्धिविनायक सिद्धि और सुख-समृद्धि देने वाले जबकि विघ्नविनाशक विघ्नों को हरने वाले माने गए हैं।
आजादी की लड़ाई से लोगों को जोड़ने के लिए इस मंदिर में जुटते थे शहर के क्रांतिकारी
त्रिलोकी झा बताते हैं कि इस मंदिर की स्थापना के केंद्र में जितनी भगवान के प्रति आस्था थी, उतनी ही देश की आजादी के लिए जोश भी था। शहर में कई स्वतंत्रता सेनानी हुए। मंदिर स्थापना कराने वाले झा परिवार के कई सदस्य आजादी की लड़ाई में शामिल थे। आजादी की लड़ाई से ज्यादा लोगों को जोड़ने के लिए क्रांतिकारियों की कई जगहों पर गुप्त बैठकें हुआ करती थीं, उन्हीं में से एक जगह टूरी हटरी का गणेश मंदिर था। मंदिर स्थापना का यह भी प्रमुख उद्देश्य था।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/news/the-first-ganesh-temple-of-the-capital-was-built-in-1933-the-only-statue-to-be-proven-here-with-tantra-127656749.html
एक टिप्पणी भेजें