विधानसभा सत्र के दूसरे दिन संसदीय सचिवों की नियुक्ति को लेकर जमकर हंगामा हुआ। शून्यकाल में संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि सरकार में 15 संसदीय सचिवों की नियुक्ति की गई है। इस मामले में भाजपा सरकार में कांग्रेस के लोग कोर्ट गए थे। अभी मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। चंद्राकर ने कहा कि उच्च न्यायालय ने जो निर्देश दिए हैं, उसे अक्षरशः सदन में बताना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा भाजपा की सरकार में संसदीय सचिव को लेकर कांग्रेस के लोग कोर्ट गए थे। सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है, फिर भी आपने नियुक्ति की। संसदीय सचिवों का स्टेटस क्या है? उनके अधिकार क्या हैं? इस पर जानकारी दी जानी चाहिए। संसदीय सचिव को लेकर पूरे प्रदेश में भ्रम की स्थिति है, वे खुद भी भ्रमित हैं।
पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि न तो वो विधायक के रूप में काम कर पा रहे हैं न मंत्री के रूप में। उनका सदन में परिचय भी नहीं कराया गया। जोगी कांग्रेस विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि काला हाथी तो सरकार बचा नहीं पा रही है अब ये सफेद हाथी ले आए। ये न तो मंत्री हैं, न विधायक हैं। उन्होंने ये भी कहा कि डॉक्टर साहब के तो सभी संसद हार गए थे। उन्होंने संसदीय सचिव की स्थिति को लेकर सर्कुलर जारी करने की मांग की। विधि मंत्री मोहम्मद अकबर ने जवाब में कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देश आए हैं, उनका पालन किया गया है। विधायकों के अधिकार के बारे में नियमावली में है। संसदीय सचिव को उत्तर देने का अधिकार नहीं है। उन्हें केवल मंत्रियों की सहायता के लिए नियुक्त किया गया है, इसलिए उनका परिचय नहीं कराया गया। अकबर ने कहा कि जो मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, उस पर चर्चा नहीं हो सकती। संसदीय सचिव को विधानसभा के कार्यों में मंत्रियों को सहयोग करना है। इस पर सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि क्या संसदीय सचिवों की सदन में परिचय कराने की परंपरा है। यदि है तो आपने कराया था क्या। और उच्च न्यायालय का फैसला आपके कार्यकाल में आया है। उसे आपने सार्वजनिक क्यों नहीं किया। इस पर चर्चा कराने की जरूरत नहीं है। स्पीकर डॉ चरणदास महंत ने कहा कि आपका प्रस्ताव मेरे पास विचार के लिए रखा गया है, लेकिन विपक्षी सदस्य चर्चा की मांग को लेकर हंगामा करते रहे।
मोहले के सवाल पर गृहमंत्री नहीं बता पाए राष्ट्रपति का नाम, धर्मजीत बोले- दुर्भाग्य है
मानसून सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक के सवाल पर गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू राष्ट्रपति का नाम नहीं बता पाए। इस पर जोगी कांग्रेस विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि यह तो दुर्भाग्य है।
दरअसल विधायक पुन्नूलाल मोहले ने बलौदा बाजार के गिरौदपुरी धाम में दर्शन व सार्वजनिक भवन निर्माण में देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा इसके लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई थी। अब तक कितने निर्माण प्रारंभ हुए हैं और नहीं हुए तो क्यों? इसके जवाब में गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि राष्ट्रपति ने भूमिपूजन किया था। 2 करोड़ 50 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी और निर्माण जारी है। मोहले ने पूरक प्रश्न में पूछा कि किस राष्ट्रपति ने भूमिपूजन किया था? लेकिन गृहमंत्री साहू राष्ट्रपति का नाम नहीं बता पाए। उन्हाेंने सिर्फ इतना कहा कि जो भी जानकारी विधायक मांग रहे हैं, उन्हें उपलब्ध करा दूंगा। इस बीच जनता कांग्रेस के विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि भारत में गिने-चुने राष्ट्रपति हुए हैं, कौन राष्ट्रपति छत्तीसगढ़ आया था, अगर यह भी नहीं बता पाएंगे तो दुर्भाग्य है। मोहले ने बताया कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भूमिपूजन किया था। उन्होंने पूछा कि देरी काेरोना के कारण हुआ था कि कोविंद के कारण। साहू ने कहा लॉकडाउन की वजह से काम में देरी हुई। वर्तमान में नींव की खुदाई प्रगति पर है।
धर्मजीत ने पीडब्ल्यूडी मंत्री से कहा- गडकरी जी सड़क का गड्ढा नहीं भरवा रहे तो आप भरवा दें
विधायक डॉ. प्रीतम राम ने सड़कों का निर्माण और मरम्मत गुणवत्तापूर्ण नहीं होने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि पैच रिपेयर का काम ठीक से नहीं चल रहा है। गुणवत्ता अच्छी नहीं है। पीडब्ल्यूडी मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि सरकार बनने के बाद सड़कों की क्वालिटी कंट्रोल करने की कोशिश की गई है। पहले अखबारों में गड्ढाें के फोटो आते थे, अब नहीं आ रहे हैं। विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाइवे में बहुत बड़े-बड़े गढ्ढे हो गए हैं। गडकरीजी गड्ढे नहीं भरवा रहे तो आप भरवा दें।
पीडब्ल्यूडी में जूनियरों को प्रभार पर नेता प्रतिपक्ष और मंत्री के बीच नोंकझोंक
पीडब्ल्यूडी में उच्च पदों पर सीनियर अफसरों को छोड़ जूनियर अफसरों की पदस्थापना को लेकर प्रश्नकाल के दौरान काफी नोंक-झोंक हुई। पीडब्ल्यूडी मंत्री ताम्रध्वज साहू ने माना कि 15 सीनियर अफसर, जूनियर को प्रभार देने के कारण कम महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक के पूरक सवाल पर साहू ने कहा कि यदि डेढ़ साल पहले आप लोग डीपीसी करवा दिए होते और सबका प्रमोशन कर दिए होते तो यह स्थिति नहीं आती। साहू ने कहा कि सरकार सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों का अक्षरश: पालन कर रही है। वरिष्ठता सह योग्यता के आधार पर उनको प्रभार दिया जाता है।
पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि वरिष्ठता एक अलग क्रम है, जैसे वहां पर किसी को तत्काल प्रभार देना है। किसी का ट्रांसफर हुआ है, किसी की पोस्टिंग हुई है, तो वहां उनकी योग्यता सीनियर अफसर तय करते हैं कि इनके कामकाज कैसे रहे हैं। उस योग्यता के आधार पर चालू प्रभार दिया जाता है। नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि वर्तमान में पीडब्ल्यूडी के ईएनसी विजय भतपहरी को बिठाया गया है। उनकी जगह वरिष्ठता क्रम में कोई और अफसर है। इस पर पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि वरिष्ठता क्रम आपके जमाने से बना हुआ है। बीच-बीच में आवेदन आते हैं, उसके अनुसार जांच के बाद वरिष्ठता क्रम बदलते गया है। साहू ने कहा कि वर्ष 2012 से 2018 में डीके प्रधान को ईएनसी बनाया गया, जबकि उस वक्त वे पांचवें क्रम में थे। वहीं डीके अग्रवाल दूसरे क्रम में और विजय भतपहरी चौथे क्रम में थे। उसके बाद आवेदन आया फिर जांच हुई। अग्रवाल प्रथम क्रम में हैं और उन्हें बनाया गया। भतपहरी का आवेदन आया था। उसकी जांच चल रही है। पीडब्ल्यूडी में डीके अग्रवाल के बाद केके पिपरी हैं। उसके बाद विजय भतपहरी और फिर कोरी हैं। सबको अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। नेता प्रतिपक्ष ने फिर सवाल उठाया कि पीपरी और अग्रवाल के खिलाफ कोई जांच चल रही थी क्या, जिसके कारण भतपहरी श्रेष्ठ पाए गए और उन्हें ईएनसी बनाया गया। पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि ईएनसी पद की योग्यता और कार्यक्षमता के अनुसार होता है। नेता प्रतिपक्ष ने चार अफसरों सुंदरलाल मरकाम, जेपी तिग्गा, एके श्रीवास और विकास श्रीवास्तव को लेकर भी जानकारी चाही। उन्होंने कहा कि क्या इनके खिलाफ कोई विभागीय जांच लंबित है और जांच चलने के बावजूद प्रभार दे दिया गया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसी के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है तो उसे प्रभारी नहीं बनाया जा सकता। पीडब्ल्यूडी मंत्री ने बताया कि मरकाम के खिलाफ विभागीय जांच पूरी हो चुकी है। अधीक्षण अभियंता सेतु मंडल का पद खाली था इसलिए उन्हें प्रभार दे दिया गया।
उन्होंने कहा कि जेपी तिग्गा को आरोप पत्र जारी किया गया था लेकिन विभागीय जांच संस्थित नहीं हुआ। उन्हें अंबिकापुर मंडल का पद खाली होने पर दे दिया गया। विकास श्रीवास्तव के खिलाफ आरोप पत्र जारी हुआ है लेकिन विभागीय जांच संस्थित नहीं हुआ है, इसलिए उन्हें सुकमा संभाग का रिक्त पद का प्रभार दिया गया है। नेता प्रतिपक्ष ने सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है। पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों का पालन किया जा रहा है। पहली बार एक साथ 8 सीई के पद पर पदोन्नति हुई है।
घटिया बीज सप्लाई पर हंगामा, होगी जांच
कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने बुधवार को घटिया बीज सप्लाई के मुद्दे पर चर्चा में जांच करने और कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने का ऐलान किया। कृषि मंत्री ने कहा कि ऐसी कंपनियों को ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक व सौरभ सिंह ने ध्यानाकर्षण के जरिए घटिया बीज सप्लाई का मुद्दा उठाया। कौशिक ने कहा कि बीज निगम ने जेकेआरएच 3333 वैरायटी के धान और जेकेएमएच 2222 वैरायटी के मक्का बीज सप्लाई का ऑर्डर दिया था। कंपनी ने बीज की सप्लाई नहीं की। इसके बावजूद बीज निगम ने संबंधित कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। 15 दिनों में बीज सप्लाई नहीं करने पर ब्लैक लिस्टेड करने का प्रावधान है, लेकिन 15 दिन के बाद सप्लाई की गई है। सोयाबीन और स्वर्णा धान के घटिया बीज की सप्लाई की गई। इससे किसानों में नाराजगी है। कृषि मंत्री चौबे ने अपने वक्तव्य में जांच कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
हाथियों की मौत पर तस्करी का आरोप, हंगामा
राज्य में हाथियाें की मौत का मुद्दा बुधवार को सदन में गंूजा। भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने हाथियों की मौत के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर के तस्कर सक्रिय होने का आरोप लगाया। इसे लेकर विपक्ष के विधायकों ने आक्रामकता से सरकार पर हमला बोला। हालांकि वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने तस्करी के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में जहर या करंट से मौत की बात सामने आई है, उनमें अपराध दर्ज कर कार्रवाई की गई है। भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल, अजय चंद्राकर, नारायण चंदेल ने ध्यानाकर्षण सूचना में कहा कि वन विभाग की लापरवाही के कारण हाथियों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। 18 महीने में छत्तीसगढ़ शिकारियों का प्रिय केंद्र बन गया है। तीन महीने में ही दस से अधिक हाथियों की मौत हुई है। विधायकों ने आरोप लगाया कि कहीं भी हाथियों की मौत प्राकृतिक नहीं है, बल्कि योजनाबद्ध ढंग से हुई है।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/news/uproar-in-parliament-on-parliamentary-secretaries-opposition-raised-questions-neither-are-ministers-nor-mlas-state-their-status-127656732.html
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