विधानसभा सत्र, 4 घंटे 40 मिनट चली बहस, विपक्ष और सरकार के बीच नोंक-झोंक

कोरोना काल में पहली बार विधानसभा का सत्र शुरू हुआ और आरोप-प्रत्यारोप के बीच 4 घंटे 40 मिनट तक कोरोना पर चर्चा हुई। लेकिन इस वक्त की सबसे बड़ी चिंता कोरोना है। प्रदेश में कोरोना के मरीज 24 हजार के पार हो चुके हैं। बुधवार को भी 1045 मरीज सामने आए। ऐसे में जनता अपने विधायकों की तरफ इस उम्मीद से देख रही है कि कोरोना और जीवन पर कोरोना से होने वाले असर से वे कैसे निपटेंगे? इस सवाल का जवाब विधानसभा में सबको एकजुट होकर निकालना पड़ेगा, न कि केवल राजनीति करके। मानव इतिहास के इस गंभीर संकट का समाधान निकालना पहली प्राथमिकता है। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि सरकार चाहे केंद्र की हो या राज्य की, आरोप लगाने से समाधान नहीं मिलेगा। राज्य सरकार जो व्यवस्था कर रही है, उसमें और क्या किया जा सकता है, यह भी तो सदन से निकलकर आना चाहिए।

सीएम भूपेश ने कहा कि पूरे देश में नेशनल डिजास्टर एक्ट लागू, उसी गाइडलाइन के मुताबिक ही हम कर रहे हैं काम
कोरोना की दस्तक के 152 दिन बाद विधानसभा के मानसून सत्र में स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा हुई। चर्चा के दौरान एक तरफ भारतीय जनता पार्टी की ओर से बृजमोहन अग्रवाल और अजय चंद्राकर ने सरकार पर कोरोना से निपटने में नाकामी के आरोप लगाए, तो जवाब देते हुए स्वास्थ्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि अभी 10 से 12 हजार जांच रोज हो रही है, जिसे सितंबर तक 20 हजार तक कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम दिन-रात कोरोना के बारे में सोचते हैं। सीएम भी इसकी रोज मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पूरे देश में नेशनल डिजास्टर एक्ट लगा है। उसकी गाइडलाइन के मुताबिक ही हम काम कर रहे हैं। अपनी तरफ से हम कोई भी नियम लागू नहीं कर सकते। सीएम ने कहा कि केन्द्र सरकार की गलत नीतियों के कारण कोरोना फैला है।
बुधवार को कोरोना पर विपक्षी सदस्यों ने स्थगन प्रस्ताव दिया था जिसे आसंदी द्वारा ग्राह्य किया गया और चर्चा के लिए दो घंटे का समय निर्धारित किया गया। दोपहर साढ़े तीन बजे शुरु हुई, चर्चा चार घंटे चालीस मिनट तक चली इस दौरान पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच कई बार तीखी नोंक-झोंक भी हुई लेकिन सभी सदस्यों ने कोरोना से निपटने के लिए सरकार के कार्यों में सुधार करने और दलगत राजनीति से उपर उठकर काम करने की बात कही। स्पीकर डा.चरणदास महंत ने स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा पूरी होने के बाद सभी कोरोना वारियर्स का सम्मान करते हुए उनका अभिवादन भी किया।
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर द्वारा दिए गए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत बृजमोहन अग्रवाल ने की। अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार के क्रियाकलाप कोरोना फैलाने के लिए दोषी है। क्वारेंटाइन सेंटर आत्महत्या का केंद्र बन गए हैं। कलेक्टरों के पास पैसा नहीं है। वे स्थानीय व्यापारियों के सामने भीख मांग रहे हैं? 6 लाख प्रवासी मजदूरों को सिर्फ 36 रुपए का चावल देकर सरकार अहसान कर रही है क्या? उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए सीएम और स्वास्थ्य मंत्री को बैठाकर बात करनी चाहिए तभी कोरोना रोकने में सफल होंगे। उन्होंने कोरोना से हो रही मौतों को सरकार की लापरवाही से हत्या होने की बात कही।
विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि चार बांस और चार बल्ली मतलब कंटेनमेंट जोन लेकिन यहां कौन आता है कौन जाता है इसकी देखरेख करने वाला कोई नहीं हैै। स्वास्थ्य मंत्री को बिना हथियार के कोराेना से लड़ने के लिए उतार दिया गया है। उनके पास पैसा नहीं है। चंद्राकर ने कहा कि पिछले सत्र में कोरोना आ गया था। लेकिन न तो सरकार की ओर से कोई वक्तव्य आया न ही विधायकों से सुझाव मांगे गए। उन्होने कहा कि दारु भट्‌टी और कांग्रेस के आयोजन से कोरोना नहीं फैलता। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रदर्शन गैर जिम्मेदाराना रहा। उन्होंने सरकार के यह भी आश्वासन चाहा कि यदि कोरोना की वैक्सीन आई तो इसे प्रदेश के सभी लोगों को दिया जाएगा।

जोगी कांग्रेस विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि कोरोना की लड़ाई में सबने तन-मन-धन से भाग लिया है। उन्होंने कहा कि यह समय झगड़े का नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य मंत्री और सीएम एक साथ बैठकर चाय पिएं, तो कोरोना का हल निकल जाएगा और यह काफी हद तक कम हो जाएगा।

केंद्र ने क्यों खोलीं सीमाएं: भूपेश
सीएम ने कहा कि केंद्र ने सीमाएं खोल दीं, ट्रेनें चला दीं, हवाईजहाज शुरु कर दिया, इसके बाद से ही केस बढ़े। सीएम ने कहा कि मैं और बाबा साहब बैठते भी हैं, चाय भी पीते हैं और खाना भी खाते हैं।

विधायकों से बात करें: डाॅ. रमन
पूर्व सीएम डा. रमन सिंह ने कहा कि पीएम एक नहीं बल्कि छह बार राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करते हैं, लेकिन यहां सीएम और स्वास्थ्य मंत्रियों ने आज तक विधायकों से बात नहीं की।

21579 क्वारेंटाइन सेंटर: सिंहदेव
स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि प्रदेश के 21 हजार 579 क्वारेंटाइन सेंटर में 7 लाख 7 हजार 286 लोगों को रखा गया था जिनमें से 6 लाख 70 हजार 824 लोग घर जा चुके हैं।

सरपंच हो गए कर्जदार: धरमलाल
नेता प्रतिपक्ष धरमलाल काैशिक ने कहा कि क्वारेंटाइन सेंटर में होने वाले आत्महत्या की जांच होनी चाहिए। सरपंचों के सहारे उन्हें छोड़ दिया गया है जिससे कई सरपंच कर्जदार हो गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पंचायतों को 33 रुपए किलो में चावल दिया और पैसों की वसूली भी की। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन से लोग परेशान रहे।



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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/news/assembly-session-debate-lasted-for-4-hours-and-40-minutes-fights-between-opposition-and-government-127656654.html

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