नेताओं के बीच मतभेद के कारण भाजपा को पांच जिलों के अध्यक्ष तय करने में देर हो रही है। यही वजह है कि प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय की नई कार्यकारिणी भी अटक गई है। संगठन के नेताओं का कहना है कि जिलाध्यक्षों के नाम तय होने के बाद ही कार्यकारिणी घोषित की जाएगी। यानी इस माह जिलाध्यक्षों के नाम तय होने की उम्मीद कम ही है।
भाजपा के तीसरी बार अध्यक्ष बने साय को अब तीन महीने होने को हैं। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद साय ने नए जिले गौरेला पेंड्रा मरवाही समेत 6 जिलों के अध्यक्ष की घोषणा की है। अभी भी पांच जिलों के अध्यक्षों की घोषणा बाकी है। इनमें रायपुर शहर, ग्रामीण, दुर्ग, भिलाई और बलरामपुर शामिल हैं। रायपुर में पूर्व मंत्रियों बृजमोहन अग्रवाल, राजेश मूणत के अलावा सांसद सुनील सोनी और संगठन की ओर से कई दावेदार हैं। दुर्ग और भिलाई में सांसद सरोज पांडेय, पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय व सांसद विजय बघेल के समर्थक हैं। यही स्थिति बलरामपुर में भी है।
सौदान-साय में कई दौर की बातचीत
राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह, प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय और संगठन महामंत्री पवन साय के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। इसमें बचे हुए जिलों के लिए भी नाम पर रायशुमारी हो चुकी है। कार्यकर्ताओं की नाराजगी का टोह लेने के लिए सौदान नियमित रूप से कार्यकर्ताओं से बातचीत भी कर रहे हैं। हाल में जिन जिलों में जिलाध्यक्ष की नियुक्ति की गई है, उससे पहले स्थानीय नेताओं से बातचीत भी की गई है, जिससे किसी तरह की अव्यवस्था की स्थिति न बने। रायपुर और दुर्ग-भिलाई काे लेकर फिलहाल संगठन के नेता आश्वस्त नहीं हो पा रहे हैं, इसलिए घोषणा नहीं की जा रही है।
अपनों पर साजिश का शक
भाजपा संगठन में अब अलग-अलग गुट के नेता एक-दूसरे पर कार्यकर्ताओं को बगावत के लिए उकसाने का आराेप लगा रहे हैं। सोशल मीडिया पर नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं को अब उनके नेताओं के इशारे पर अनर्गल पोस्ट करने की बात की जा रही है। अभी भी कार्यकर्ता लगातार सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं। इसमें भीतरी-बाहरी का भी मुद्दा है। व्यापारी वर्ग से आने वाले नेताओं के बजाय छत्तीसगढ़िया को प्राथमिकता देने की मांग की जा रही है।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/news/delay-in-deciding-bjp-district-president-due-to-pull-in-leaders-so-executive-too-stuck-127656695.html
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