लंका कूच से पहले जिस तरह रामेश्वरम् में भगवान राम ने शिवलिंग स्थापित कर पूजा-अर्चना की थी, उसी तरह उत्तर से दक्षिण भारत में प्रवेश से पहले उन्होंने छत्तीसगढ़ में रामपाल नामक स्थान पर भी शिवलिंग स्थापित कर आराधना की थी। रामपाल बस्तर जिले में है। यहां प्रभु राम द्वारा स्थापित शिवलिंग आज भी विद्यमान है। राज्य सरकार ने अब इसे संवारने का फैसला किया है। मां सीता की खोज में दक्षिण भारत में प्रवेश से पहले प्रभु राम ने रामपाल के बाद सुकमा जिले के रामाराम में भी भू-देवी की आराधना की थी। शासन ने अब दोनों स्थानों को भी अपने नए पर्यटन सर्किट में शामिल कर उनके सौंदर्यीकरण और विकास की योजना तैयार कर ली है। राज्य का नया पर्यटन सर्किट, बढ़िया सड़कों समेत तमाम अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ उन स्थानों को आपस में जोड़ेगा जहां से श्रीराम अपने वनवास के दौरान या तो गुजरे थे, या फिर उन्होंने प्रवास किया था। प्रदेश में श्रीराम के वन गमन पथ पर पड़ने वाले 75 स्थानों को चिन्हित किया गया है। इनमें से पहले चरण में उत्तर में स्थित कोरिया से लेकर दक्षिण में सुकमा के रामाराम तक 9 स्थानों का चयन किया गया है। इन स्थानों के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए भूपेश बघेल सरकार 137 करोड़ 45 लाख रुपए खर्च करने जा रही है। भगवान राम द्वारा स्थापित शिवलिंग वाले स्थान रामपाल की दूरी जगदलपुर से 10 किलोमीटर है। इस शिवलिंग के रामायणकालीन होने की पुष्टि विद्वानों ने और शोध संस्थानों ने की है। सुकमा जिले का रामाराम छत्तीसगढ़ की सीमा के निकट स्थित है, जहां से आंध्रप्रदेश व तेलंगाना की सीमाएं पास हैं।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/lord-rama-installed-shivling-in-chhattisgarh-before-rameswaram-the-government-will-decorate-it-127582968.html
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