पर्युषण पर्व का तीसरा दिन, लाभांडी के जैन मंदिर में हुई उत्तम आर्जव धर्म पूजा

पद्मप्रभ दिगम्बर जैन मंदिर लाभांडी में मंगलवार को पर्युषण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की पूजा की गई। श्रीजी के अभिषेक व शांतिधारा का सौभाग्य नागपुर निवासी राजकुमार बड़जात्या व राजनांदगांव निवासी अमित जैन को प्राप्त हुआ। आरती के बाद नित्य नियम की पूजा और उसके बाद सोलह कारण, पंचमेरु, दशलक्षण व विधान में उत्तम आर्जव की पूजा की गई। पद्मप्रभ भक्त परिवार के सदस्य अरविंद जैन ने बताया कि उत्तम आर्जव धर्म हमें छल कपट से दूर रहकर जीवन जीने की कला सिखाता है। आज के युग में मानव अपने कथनी व करनी में बहुत भेद करता है, जो कि छल कपट की श्रेणी में आता है। संसार में जो भी किसी के साथ दगा करता है, उसे स्वयं के जीवन में भी दूसरों से धोखा खाना पड़ता है। अर्थात् दगा किसी का सगा नहीं होता। उत्तम आर्जव धर्म हमें सिखाता है कि किसी के साथ भी छल कपट नहीं करके जो मन में वचन में हो उसे ही क्रियान्वयन में लाना चाहिए। छल कपट करने वाले व्यक्ति का ये संसार तो बिगड़ता ही है और वह अपने अगले भव को भी बिगाड़ लेता है। आर्जव शब्द ऋजुता से बना है जिसका अर्थ सरलता, निष्कपटता का भाव है। उत्तम आर्जव धर्म अपने हृदय में सरलता व निष्कपटता के साथ जीना सिखाता है। जैन धर्म के ये दस धर्म मानव क्रमानुसार आत्मसात कर अपना जीवन जिये तो वो संसार में भी प्रशंसा का पात्र रहता है और इन धर्मों के द्वारा पुण्यार्जन कर भावी जीवन भी सुधार सकता है। पर्युषण पर्व के चौथे दिन बुधवार को उत्तम शौच धर्म की पूजा की जाएगी अर्थात ये धर्म हमें हृदय में शुचिता के भाव लेकर जीवन जीने की कला सिखाता है।



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Third day of Paryushan festival, best Arjava dharma puja performed in Jain temple of benefandi


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/third-day-of-paryushan-festival-best-arjava-dharma-puja-performed-in-jain-temple-of-benefandi-127653505.html

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