वन परिक्षेत्र कुल्हाड़ी घाट के भालूडिग्गी, दर्रीपारा, कुल्हाड़ी घाट के इलाकों में हाथियों ने उत्पात मचाते हुए किसानों की फसलों को रौंदा डाला और घरों को भी नुकसान पहुंचाया है। ग्रामीणों ने इसकी जानकारी वनपरिक्षेत्र अधिकारी को देकर मुआवजे की मांग की है।
गुरुवार दरमियानी रात करीब 11 बजे जब गांव में सब ग्रामीण सो रहे है थे, तभी अचानक 10 से 12 हाथियों का दल चिंघाड़ते हुए गांव में घुस गया और मकानों को क्षति पहुंचाने लगा। देखते ही देखते पूरे गांव में दहशत और शोर मच गया। लोगों ने घरों के छप्परों को तोड़ बच्चों को जैसे-तैसे बाहर निकाल पेड़ पर चढ़कर जान बचाई।
ग्राम भालूडिग्गी में हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया और घरों को तोड़ा और बाड़ी में लगी फसलों को भी सफाचट कर दिया। बुधराम, सुखदेव, सोनाधर, पंचम, अमर सिंह और घनश्याम ने बताया कि पहली बार उनके ग्राम भालूडिग्गी में हाथियों का दल रात को अचानक आ धमक और घरों के छप्परों को तोड़ डाला।
घरों में रखी राशन सामग्री दाल, चावल भी खा गए। हाथियों के चिंघाड़ से ग्रामीणों ने पूरी रात दहशत में गुजारी। ग्रामीणों ने बताया कि इसके पूर्व हाथियों के दल की क्षेत्र के पहाड़ी इलाके के गांवों में लगातार आने की सूचना मिल रही थी लेकिन इस गांव में पहली बार हाथियों का दल ने आंतक मचाया है।
ओडिशा सीमा वन क्षेत्र में विचरण
10 से 12 हाथियों के दल में 3 शावकों के होने की जानकारी वन विभाग ने दी है। हाथियों ने भालूडिग्गी, दर्रीपारा में किसान सोनधर, सुखदेव, घनश्याम, अमरसिंह, पंचम आदि की बाड़ी, फसल, घर को क्षति पहुंचाने के बाद ओडिशा सीमा वन क्षेत्र में विचरण कर रहे हैं। हाथियों के चिंघाड़ने की आवाज सुनाई देने से कुल्हाड़ी घाट क्षेत्र के ग्रामीण डर के मारे घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। विभाग ने हाथी वाले इलाके मे नहीं जाने की मुनादी के साथ अपील भी की है।
क्षति का आंकलन कर मुआवजा
वन परिक्षेत्र अधिकारी सुदर्शन राम नेताम ने बताया कि गज मित्रों से जानकारी मिली कि कुल्हाड़ी घाट के भालूडिग्गी, दर्रीपारा में हाथियों ने उत्पात मचाया है। आदिम जनजाति परिवारों के घर को तोड़ते हुए स्कूल भवन को भी उजाड़ दिया है, फसल को भी नुकसान पहुंचाया है। विभाग क्षति की आंकलन कहा रहा है। मुआवजा प्रकरण तैयार करने के बाद दिया जाएगा।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/mainpur/news/elephants-ravage-homes-crush-crops-as-well-127717486.html
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